आकाशवाणी

भारत में रेडियो स्टेशनों की संख्या को सरकारी (आकाशवाणी) और निजी (प्राइवेट एफएम) दोनों तरह के स्टेशनों में बाँटकर समझना सबसे अच्छा है।
 भारत में रेडियो स्टेशनों की संख्या 949 (लगभग) है,
1. 📻 आकाशवाणी (AIR) / पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर
 * स्टेशनों की संख्या: नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के पास देश भर में 262 से अधिक ब्रॉडकास्टिंग केंद्र हैं।
 * कवरेज: आकाशवाणी अपने विशाल ट्रांसमीटर नेटवर्क (FM, MW, SW) के माध्यम से देश के 99.19% जनसंख्या और 91.85% भौगोलिक क्षेत्र तक पहुँचती है।
2. 🎶 प्राइवेट FM रेडियो स्टेशन
 * संख्या: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के मार्च 2024 तक के आँकड़ों के अनुसार, देश के 113 शहरों में 388 प्राइवेट FM रेडियो स्टेशन कार्यरत हैं।
3. 🏫 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन
 * संख्या: सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अनुसार, लगभग 494 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन (सामुदायिक रेडियो) वर्तमान में भारत में कार्यरत हैं। ये स्टेशन स्थानीय समुदायों की सेवा करते हैं।
इस तरह, भारत में रेडियो स्टेशनों का एक बहुत बड़ा और विविधतापूर्ण नेटवर्क मौजूद है, जो लाखों लोगों तक सूचना और मनोरंजन पहुँचाता है।


आकाशवाणी का इतिहास भारत में रेडियो प्रसारण के इतिहास से जुड़ा हुआ है।
🎧 आकाशवाणी की शुरुआत (नामकरण) और विकास 1957 में किया गया, 
हालांकि, भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत और AIR की स्थापना इससे बहुत पहले हुई थी।
📻 प्रसारण की शुरुआत और AIR की स्थापना
 * सबसे पहले : भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1927 में हुई, जब मुंबई और कोलकाता में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने दो निजी ट्रांसमीटरों के माध्यम से प्रसारण शुरू किया।
 * राष्ट्रीयकरण : IBC वित्तीय समस्याओं के कारण 1930 में बंद हो गई। इसके बाद, ब्रिटिश अधिकारियों ने 1930 में इसका राष्ट्रीयकरण किया और इसे इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (ISBS) का नाम दिया।
 * ऑल इंडिया रेडियो (AIR) : 8 जून 1936 को, ISBS का नाम बदलकर औपचारिक रूप से ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio - AIR) कर दिया गया।
 * पहला निजी रेडिओ : यह भी उल्लेखनीय है कि मैसूर में एम.वी. गोपालस्वामी ने 1936 में अपने निवास पर एक निजी रेडियो स्टेशन शुरू किया था, जिसे उन्होंने 'आकाशवाणी' नाम दिया था।
📢 'आकाशवाणी' की शुरुआत 
 * 1957 में, भारत सरकार ने ऑल इंडिया रेडियो (AIR) को भारतीय संस्कृति और परंपरा से प्रेरित एक नाम देने का निर्णय लिया।
 * रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1938 में कोलकाता के शॉर्टवेव सेवा के उद्घाटन पर लिखी गई एक कविता में इस शब्द का उपयोग किया गया था, जिसका अर्थ है 'आकाश से वाणी' या 'देववाणी'।
 * इसी नाम को 1957 में राष्ट्रीय प्रसारक ऑल इंडिया रेडियो के लिए आधिकारिक रूप से अपनाया गया।

       संक्षेप में, भारतीय रेडियो प्रसारण की जड़ें 1927 से जुड़ी हुई हैं, जिसे 1936 में ऑल इंडिया रेडियो नाम मिला, और बाद में 1957 में इसे आकाशवाणी का नाम दिया गया।




Comments